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क्या ये फीचर्स सच में काम के हैं? भारतीय कारों के 10 बेकार फीचर्स जो ज़मीन पर फेल हो जाते हैं

Published On: February 2, 2026
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भारतीय कारों के बेकार फीचर्स
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स्थान: भारत |तारीख: 2 February 2026 |रीड टाइम: 4-5 मिनट

सारांश:
भारतीय कार बाज़ार में आज फीचर्स की होड़ लगी हुई है। कंपनियाँ ब्रॉशर में जितने ज़्यादा फीचर्स दिखा सकें, उतना बेहतर मानती हैं। लेकिन असल ड्राइविंग और रोज़मर्रा के इस्तेमाल में कई फीचर्स ऐसे हैं, जो या तो सही से काम नहीं करते या कुछ समय बाद पूरी तरह नज़रअंदाज़ कर दिए जाते हैं।

फीचर्स की लिस्ट लंबी है, लेकिन इस्तेमाल कितने के?

1. Cooled Glove Box – नाम बड़ा, काम छोटा
कूल्ड ग्लव बॉक्स सुनते ही लगता है कि कार के अंदर मिनी फ्रिज मिल गया है। लेकिन हकीकत में यह फीचर AC की हल्की हवा को सिर्फ ग्लव बॉक्स की तरफ मोड़ देता है। भारतीय गर्मी में न तो पानी सही से ठंडा रहता है, न दवाइयाँ सुरक्षित रहती हैं। ज़्यादातर मालिक कुछ दिनों बाद इसका ढक्कन खोलना ही भूल जाते हैं।

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2. Rear AC Vents Without Control, लेकिन कंट्रोल ड्राइवर के पास
पीछे बैठे यात्रियों के लिए Rear AC Vents होना अच्छा लगता है, लेकिन जब तापमान बदलने का कोई अलग कंट्रोल न हो, तो यह आधा-अधूरा फीचर बन जाता है। पीछे बैठा व्यक्ति गर्मी या ठंड से परेशान हो, लेकिन उसे ड्राइवर से बार-बार कहना पड़े — यही वजह है कि इसका असर सीमित रह जाता है।

3.Touch-Based AC Controls – दिखावा ज़्यादा, सुविधा कम
फिज़िकल बटन हटाकर Touch-Based AC Controls देना मॉडर्न लगता है, लेकिन भारतीय सड़कों की हालत को देखते हुए यह ध्यान भटकाने वाला बन जाता है। गड्ढों और ट्रैफिक के बीच सही तापमान सेट करना आसान नहीं रहता, जिससे ड्राइविंग से ध्यान हटता है।

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4. Voice Command (That Doesn’t Understand) जो इंडियन एक्सेंट नहीं समझते
कई कारों में Voice Command दिए जा रहे हैं, लेकिन ये सिस्टम भारतीय उच्चारण, भाषा मिश्रण (हिंग्लिश) और शोर को सही से समझ नहीं पाते। नतीजा यह होता है कि ड्राइवर कुछ समय बाद इस फीचर को इस्तेमाल करना ही छोड़ देता है।

5. Wireless Charging (Overheating Phone): जो फोन को ज़्यादा गरम कर दे
Wireless Charging प्रीमियम फीचर माना जाता है, लेकिन भारतीय तापमान और लंबी ड्राइव में फोन गर्म हो जाता है। कई बार चार्जिंग धीमी हो जाती है या अपने-आप बंद भी हो जाती है, जिससे यह सुविधा से ज़्यादा परेशानी बन जाती है।

6. Third-Row Seat in Compact SUV: – काग़ज़ पर 7-सीटर
कई SUVs खुद को 7-सीटर बताती हैं, लेकिन तीसरी रो में बैठना बच्चों या बहुत छोटे सफर के लिए ही ठीक होता है। घुटनों की जगह और हेडरूम की कमी इसे रोज़मर्रा के इस्तेमाल के लायक नहीं बनाती।

7. Ambient Lighting That Goes Unnoticed, जो कुछ दिन बाद दिखनी ही बंद हो जाए
शुरुआत में Ambient Lighting प्रीमियम एहसास देती है, लेकिन जब रंग बदलने का विकल्प न हो या रोशनी बहुत हल्की हो, तो कुछ समय बाद लोग इसे नोटिस करना ही बंद कर देते हैं।

8. Paddle Shifters With Low-Power Engine: कम पावर इंजन में पैडल शिफ्टर्स
Paddle Shifters रेसिंग कारों की याद दिलाते हैं, लेकिन जब इंजन में ताक़त ही न हो, तो ये सिर्फ सजावट बन जाते हैं। स्पोर्टी दिखने के अलावा इनका असली फायदा बहुत कम होता है।

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9. Auto Start-Stop in Traffic: – शहरों में सिरदर्द
ईंधन बचाने के लिए बनाया गया यह सिस्टम ट्रैफिक में बार-बार इंजन बंद कर देता है। भारतीय शहरों की भीड़ में यह कई ड्राइवर्स को परेशान करता है, इसलिए ज़्यादातर लोग इसे ऑफ ही रखते हैं।

10. Sunroof That Stays Closed – ट्रेंड ज़्यादा, इस्तेमाल कम
Sunroof आज भारतीय कार बाज़ार का सबसे बड़ा ट्रेंड बन चुका है। लेकिन धूप, धूल, गर्मी और ट्रैफिक को देखते हुए ज़्यादातर मालिक इसे साल में एक-दो बार ही खोलते हैं। फिर भी यही फीचर कार खरीदने का बड़ा कारण बन जाता है।


असल बात यही है

फीचर्स की संख्या बढ़ाने से कार बेहतर नहीं बनती। असली सवाल यह है कि कौन-सा फीचर भारतीय सड़कों, मौसम और रोज़मर्रा की ज़िंदगी में सच में काम आता है।

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